अश्वगंधा के गुण और उसके उपयोग , Ashvgandha Ke Gun Or Uske Upyog |

अश्वगंधा के लाभ और फायदे :-
Ashvgandha Ke Gun Or Uske Upyog
Ashvgandha Ke Gun Or Uske Upyog 
आयुर्वेद में अश्वगंधा का एक महत्वपूर्ण स्थान है |  यह एक बहुत ही शक्तिशाली रसायन है | यह मनुष्य के शरीर की बिगड़ी हुई अवस्था को सुधार देती है | यह औषधि शरीर का विकास करने में सहायक होती है | इसलिए इस औषधि को आयुर्वेद में संजीविनी कहा जाता है | अश्वगंधा लोगों के लिए टोनिक का काम करती है | इसे पीने से शरीर पर कोई भी बुरा प्रभाव नही पड़ता | बल्कि इसका सेवन करने से मानव के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है |
अश्वगंधा में अनेक गुणकारी तत्व पाए जाते है | जैसे एंटी एजिड , एंटी ट्यूमर , एंटी स्ट्रेस और एंटी ओक्सिडेंट | अश्वगंधा में घोड़े जैसी खुशबु होती है | इसलिए कहा जाता है कि इसका सेवन करने से मानव को घोड़े जैसी शक्ति मिलती है | अश्वगंधा के पौधे के हर हिस्से को किसी न किसी बीमारी को ठीक करने के लिए किया जाता है | इसका सेवन करने से शरीर में शक्ति , स्फूर्ति , चुस्ती और स्किन पर चमक आती है | अश्वगंधा का प्रयोग हर उम्र के बच्चे , बूढ़े , स्त्री और पुरुष एक टॉनिक की तरह करते है |
अश्वगंधा से करें बिमारियों को दूर :-
Ashvgandha se sex pawer ko badhayen
Ashvgandha se sex pawer ko badhayen 
कमजोर शरीर के लिए है लाभदायक :- जो लोग शारीरिक रूप से बहुत कमजोर होते है उनके लिए यह औषधि बहुत ही लाभदायक है | अश्वगंधा का सेवन मानव के सूखे शरीर के दुबलेपन को दूर करके शरीर के मांस की पूर्ति करता है | इसके आलावा अश्वगंधा के प्रयोग से चर्म रोग जैसी खाज , खुजली , धातु रोग , फेफड़ों की सुजन , मूर्च्छा , चक्कर आना , पेट के रोग , पेट के कीड़े , मूत्र रोग , पक्षाघात , गठिया का रोग , अल्सर , सिर का दर्द , दिल के रोग शूल और खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने में सहायक होता है | अश्वगंधा के सेवन करने से हमे उपरोक्त सभी बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है |  
अश्वगंधा का रोजाना सेवन करने से स्त्रियाँ आसानी से गर्भ धारण कर सकती है | यह माँ बनी हुई औरत के दूध में वृद्धि करती है | इसके आलावा श्वेत प्रदर , कमर दर्द और शारीरिक कमजोरी को दूर करते है |
अश्वगंधा के पौधे की जड़ को पीसकर बारीक़ कर लें | इस चूर्ण का सेवन एक से 3 महीने तक करने से शरीर  में ओज , स्फूर्ति , बल , शक्ति और चेतना आती है | यह वीर्य के रोग को भी दूर करता है और शुक्राणु की वृद्धि करता है | इसका सेवन करने से कामोतेजना बढती है |
Ashvgandha Ke Vibhinn Laabh
Ashvgandha Ke Vibhinn Laabh
अश्वगंधा का सेवन करने से पाचन किर्या सही रहती है | जिसे सुखा रोग लगा है या जो क्षय रोग से पीड़ित है उसके लिए भी अश्वगंधा का प्रयोग लाभकारी होता है यह मानव के शरीर को शक्ति देता है | इसके आलावा शरीर में होने वाले दर्द को भी दूर करता है |
अश्वगंधा के पौधे के पत्तों को पीसकर लेप बनाएं | इस लेप को स्किन पर लगाने से त्वचा से जुड़ी हुई हर समस्या से छुटकारा मिल जाता है | इसके आलावा शरीर में यदि किसी तरह का घाव बन जाये तो इसके पत्ते का लेप लगाने से राहत मिलती है | यह लेप जोड़ों की सुजन को भी कम करता है | रुकी हुई पेशाब खुल कर आने लगता है |
अश्वगंधा का सेवन करने से गैस की बीमारी , एसिडिटी की समस्या , जोड़ों का दर्द , ल्यूकोरिया ,हाई ब्लडप्रेशर आदि बीमारी को ठीक हो जाती है |
  अश्वगंधा के बहुत ही फायदेमंद औषधि है , जो लोग कैंसर से पीड़ित है | उन्हें कैंसर की दवा के साथ अश्वगंधा का भी सेवन करना चाहिए | इससे शरीर की वह कोशिकाएं ही नष्ट होती है जो कैंसर से ग्रस्त होती है | और जो स्वस्थ कोशिका होती है उसे किसी भी प्रकार की कोई हानि नही होती |
अश्वगंधा के प्रयोग से व्यक्ति की स्किन पर आने वाली झुरियां मिट जाती है | वह हमेशा जवान दिखता  है और एक लम्बी अवधि तक नीरोग जीवन जीता है | यह शरीर की कमजोरी को दूर करता है |
अश्वगंधा के पौधे की जड़ को पीसकर उसका चूर्ण बनाएं | इस चूर्ण को लगातार एक से तीन महीने तक खाएं | इस औषधि से बच्चा , बुढा , स्त्री और पुरुष की कमजोरी खत्म हो जाती है | यह शरीर की कमियों को पूरा करके शरीर की धातुओं को पुष्ट करता है | जिससे शरीर गठीला बनता है | लेकिन मोटापा नही आता | अश्वगंधा के प्रयोग से चुस्ती , फुर्ती , और चेहरे पर एक चमकाती है |
Ashvgandha Mein Koun Se Ttv Hote Hai,
Ashvgandha Mein Koun Se Ttv Hote Hai,
सुखा रोग :- बच्चों को सही खान = पाना ना मिलने के कारण उनमे सुखा रोग आ जाता है | इसे दूर करने के लिए अश्वगंधा के पौधे की तनों की सब्जी बनाकर बच्चों को खिलाने से बच्चों का सुखा रोग ठीक हो जाता है | इसके आलावा कुछ लोग अपनी उम्र से बड़े लगते है उनमे बुढ़ापा जल्द ही आ जाता है | अश्वगंधा का सेवन करने से इस समस्या से भी निजात पाई जा सकती है |
पुरुष के शुक्राणुओं में वृद्धि :- अश्वगंधा के पौधे कि जड़ को बारीक़ पीसकर दूध या घी के साथ खाएं | इस उपाय को करने से शुक्राणुओं में वृद्धि होती है और जिस व्यक्ति को नींद अच्छी तरह से नही आती इस उपचार को करने से नींद आने लगती है | इस औषधि को एक महीने तक नियमित रूप से प्रयोग करें तो दुर्बल व्यक्ति के शरीर पर मांस मज्जा आने लगते है और वह व्यक्ति  अपने आप को स्वस्थ महसूस करता है |
बच्चे के शरीर को पुष्ट बनाने के लिए उसे रोजाना अश्वगंधा के चूर्ण की थोड़ी सी मात्रा को दूध के साथ लगभग 15 दिनों तक लगातार दें | इससे बच्चा पुष्ट और स्वस्थ हो जाता है |
मोटापा दूर करें :- अश्वगंधा का उपयोग मोटापे को दूर करने के लिए भी किया जाता है | इसके लिए अश्वगंधा , मुसली , और काली मुसली को एक बराबर मात्रा में लें | अब इन तीनो को आपस में मिलाकर कूट लें और किसी कपड़े में या अन्य किसी छन्नी में छानकर चूर्ण अलग कर लें | इस तरह से इन तीनो के मिश्रण के बने हुए चूर्ण का रोजाना सुबह के समय एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ पीयें | इस उपाय को करने से मोटापा दूर हो जाता है |
डायबिटिज की बीमारी को दूर करने के लिए अश्वगंधा के चूर्ण में मेथी के चूर्ण को मिक्स करके पानी के साथ पीयें | यह अत्यंत लाभदायक है |
अश्वगंधा का रोजाना नियमित रूप से सेवन करने से खून में उपस्थित हीमोग्लोबिन की वृद्धि होती है | इसके आलावा कैंसर के रोगाणुओं से लड़ने की ताकत भी मिलती है |
अश्वगंधा और बहेडा का उपयोग
अश्वगंधा और बहेडा का उपयोग 
अश्वगंधा और बहेडा की एक समान मात्रा को लेकर बारीक़ पीस लें | अब इस पिसे हुए चूर्ण में थोडा सा गुड़ भी मिला दें | अब इन तीनो के मिश्रण की एक चम्मच की मात्रा को हल्के गर्म पानी के साथ खाएं | इस तरह एक उपचार को करने से दिल की धडकन सही रहती है और मजबूत बनती है |
दिमाक और दिल की कमजोरी को दूर करने के लिए रोजाना एक – एक चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण की सुबह के समय और शाम के समय खाएं | यदि आप इस चूर्ण को दूध के साथ खायेंगे तो अधिक लाभ मिलेगा |
अश्वगंधा दर्द निवारक भी है | इसके चूर्ण को घी या शहद के साथ खाने से साँस संबधी रोगों से निजात मिल जाती है और साथ ही साथ बदन दर्द में भी आराम मिलता है |
अश्वगंधा , विधारा , सौंठ और मिश्री की एक समान मात्रा लें | अब इन सभी को आपस में मिक्स करके बारीक़ चूर्ण बना लें | इस तैयार चूर्ण को प्रतिदिन एक चम्मच सुबह के समय और एक चम्मच शाम के समय दूध के साथ खाएं | इस औषधि को खाने से शरीर को शक्ति मिलती है और वीर्य का बल भी बढ़ता है |
अश्वगंधा के चूर्ण को दूध में मिश्री और घी मिलाकर सेवन करें | इससे शरीर में चुस्ती और फुर्ती आती है |
अश्वगंधा के चूर्ण को शहद के साथ खाने से शरीर को ताकत मिलती है |
ब्लडप्रेशर के रोग का लिए :- यदि आपका ब्लडप्रेशर हाई है तो 10 ग्राम गिलोय का चूर्ण , 20 ग्राम सूरजमुखी के बीज का चूर्ण , 30 ग्राम अश्वगंधा के पौधे की जड़ का चूर्ण और लगभग 40 से 50 ग्रांम मिश्री लें| अब इन सभी औषधि को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाकर किसी कांच की शीशी में भरकर रख दें |प्रतिदिन इस मिश्रण की एक छोटा चम्मच की मात्रा में दिन में कम से कम तीन बार लें | इस औषधि को पानी के साथ लें | इससे हाई ब्लडप्रेशर नियंत्रण में आ जाता है |
अश्वगंधा के पौधे की कुछ पत्तियों को तोडकर एक गिलास पानी में अच्छी तरह से उबाल लें | जब यह पानी उबल जाये तो इसे छानकर हल्का ठंडा होने के लिए रख दें | इसे चाय की तरह फूंक मारकर पीयें | यह उपचार लगभग तीन से चार दिन तक करें | खांसी और कफ से निजात मिल जाएगी |
Duble Shrir Ke Liye Ashvgandha
Duble Shrir Ke Liye Ashvgandha
अश्वगंधा की जड से तेल बनाया जाता है | इस तेल से जोड़ों पर मालिश करने से गठिया का रोग ठीक हो जाता है |
थायराइड के लिए :- जो व्यक्ति थायराइड ऐ पीड़ित है उसे अश्वगंधा के पौधे की पत्तियों को पीसकर लेप लगाना चाहिए | इससे थायराइड की ग्रन्थियां नही बढ़ती |
 अश्वगंधा के पौधे की जड़ , तना , पत्ती , फल और फुल आदि को मिलाकर कूट लें और से छानकर चूर्ण अलग कर लें | इस तैयार चूर्ण की एक छोटी चम्मच रोजाना सुबह के समय और शाम के समय पानी या दूध के साथ खाने से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है | यदि इस चूर्ण की आधे चम्मच की मात्रा को प्रतिदिन सुबह और शाम के समय गर्म दूध के साथ या हल्के गर्म पानी के साथ लेने  से गठिया का रोग ठीक हो जाता है | अश्वगंधा के इस मिश्रण के चूर्ण को यदि घी में थोडा सा शक्कर मिलाकर सुबह और शाम के समय खाते है तो संधिवात की समस्या दूर हो जाती है |
अश्वगंधा के चूर्ण में आधा चम्मच सौंठ का चूर्ण मिला लें | अब इन दोनों के चूर्ण में अपनी इच्छा अनुसार चीनी मिलाकर पानी के साथ खाएं | इससे गठिया रोग से मुक्ति मिल जाती है | इस औषधि का सेवन प्रतिदिन सुबह और शाम के समय करें | इसके आलावा आप अश्वगंधा के चूर्ण को घी में भी मिलाकर खा सकते है |
वात रोग के लिए :- अश्वगंधा और मेथी की एक बराबर मात्रा लें | अब इसमें थोडा सा गुड भी मिला दें और छोटी आकार की गोलियां बना लें | इस प्रकार से तैयार गोलियों में से रोजाना एक गोली सुबह के समय रो एक होली शाम के समय दूध के साथ खाएं | ऐसा करने से वात रोग दूर हो जाता है |
अश्वगंधा और विधारा के चूर्ण को आपस में मिला लें | इस मिश्रण की एक छोटे चम्मच की मात्रा को सुबह और शाम दूध के साथ लें | इस उपाय को करने से वीर्य में वृद्धि होती है और सम्भोग करने की क्षमता बढती है | इसके आलावा मानव का स्न्युत्न्त्र सही रहता है , उसे अधिक गुस्सा भी नही आता है , जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है और जिसे बार – बार सदमा लगता है उससे भी छुटकारा मिल जाता है |

अश्वगंधा के चूर्ण और गिलोय के चूर्ण की एक चम्मच की मात्रा को शहद के साथ खाने से शरीर के कई रोगों से निजात मिल जाती है |
अशवगन्धा का क्वाथ
अशवगन्धा का क्वाथ 
जीर्णवात ज्वर :- गिलोय के पौधे की छाल और अश्वगंधा के चूर्ण को आपस में मिलाकर गर्म पानी के साथ खाएं | इससे जीर्णवात ज्वर उतर जाता है |
टी बी :- जीवाणु नाशक औषधि के साथ यदि अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर खाया जाये तो टी बी के रोग में राहत मिलती है | इस औषधि को गाय के देशी घी या मिश्री के साथ खाएं |
अशवगन्धा के चूर्ण को पानी मिलाकर काढ़ा तैयार करें | इस तैयार काढ़े में लगभग चार से पाच चम्मच घी मिलाकर पाक बना लें | इस औषधि को कम से कम तीन महीने तक खाएं | इससे गर्भवती महिलाओं की शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है |
शतावरी , नागोरी और अश्वगंधा की एक समान मात्रा को लेकर पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | इस चूर्ण में देशी घी मिलाकर किसी मिटटी से बने बर्तन में रख दें | इस तैयार चूर्ण की रोजाना एक चम्मच की मात्रा को मिश्री मिले हुए दूध के साथ खाएं | इस औषधि का सेवन करने से स्तनों का आकार बढ़ता है |
मासिक धर्म सम्बधि रोग के लिए :- अगर किसी महिला को मासिक धर्म होने कोई परेशानी होती है तो इसके लिए मासिक धर्म होने से लगभग 7 से 8 दिन पहले अश्वगंधा के चूर्ण में बराबर की चीनी मिलाकर सुबह और शाम के समय खाली पेट ताज़े पानी के साथ खाएं | और जब मासिक धर्म शुरू हो जाये तो इस औषधि का सेवन बंद कर दे | इस तरह के उपचार को करने से मासिक धर्म में होने वाली परेशानिया दूर हो जाती है |   
अश्वगंधा के चूर्ण को एक साल तक खाने से शरीर की सभी रोग और दोष बाहर निकल जाते है | इससे सारे शरीर की शुधि हो जाती और शरीर की कमजोरी भी दूर हो जाती है |
Purushon Ke Liye Hai Laabhdayak
Purushon Ke Liye Hai Laabhdayak
बांझपन को दूर करने के लिए :- अश्वगंधा की एक से दो चम्मच की मात्रा को दूध में अच्छी तरह से पका लें | जब यह पक जाये तो इसे छानकर देशी घी मिला दें | इस तरह से यह एक औषधि तैयार हो गई | जब महिला का मासिक धर्म समाप्त हो जाये तो इस तैयार औषधि का सेवन करने | ऐसा करने से बांझपन की समस्या दूर हो जाती है और साथ ही साथ गर्भाशय के रोग भी ठीक हो जाते है  
गर्भधारण करने के लिय :- अश्वगंधा के चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर मिश्रण बनाएं | जब मासिक धर्म समाप्त हो जाये तो नहाने के बाद स मिश्रण को गया के दूध के साथ या ताज़े पानी के साथ एक चम्मच खाएं | इस उपाय को एक महीने तक सुबह और शाम के समय करें | इस उपाय को करने से स्त्री निश्चित रूप से गर्भधारण करती है |
बार – बार गर्भपात होने पर :- अगर किसी महिला को बार – बार गर्भपात होता है तो उसे अश्वगंधा के चूर्ण के साथ सफेद कटेरी की जड़ का रस दो – दो चम्मच की मात्रा में गर्भवती महिला को लगभग 5 से 6 महीने तक सेवन करने इस समस्या से छुटकारा मिल जाता है |
यदि कोई महिला गर्भ धारण नही कर पा रही है तो अश्वगंधा के चूर्ण का काढ़ा बनाकर उसमे घी और दूध मिलाकर स्त्री को लगभग एक सप्ताह तक पिलायें | इस उपचार को करने से स्त्री आसानी से गर्भ धारण कर लेती है | इसके आलावा जब महिला को मासिक धर्म शुरू हों में लगभग एक सप्ताह का समय बच जाये तो उसे अश्वगंधा का चूर्ण खाने के लिए दें | और जब मासिक धर्म शुरू हो जाये तो अश्वगंधा का चूर्ण ना दें | 
अशवगन्धा और नागौरी  के चूर्ण की एक समान मात्रा लें | जब महिला का मासिक धर्म खत्म हो जाये तो नहाकर शरीर को शुद्ध कर लें | इसके बाद दो चम्मच इस चूर्ण के मिश्रण को दूध के साथ खाएं | ऐसा करने से बांझपन दूर हो जाता है और महिला गर्भवती हो जाती है |
Skin Se Judi Hui Samsya Ko Dur Kren
Skin Se Judi Hui Samsya Ko Dur Kren
इस औषधि का एक साल तक नियमित रूप से सेवन करने से शरीर की काया कल्प हो जाती है | शरीर से सभी रोग दूर हो जाते है |
खून साफ करने के लिए :- चोपचीनी और अश्वगंधा को पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | स चूर्ण के मिश्रण को रोजाना सुबह एक समय और शाम के समय शहद के साथ मिलाकर खाएं | ऐसा करने से रक्त का शोधन होता है |
जिस बच्चे को सुखा रोग हो जाता है और जो व्यक्ति बीमार होने के बाद बहुत कमजोर हो जाते है , शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए , थकान अधिक होने पर , बुढ़ापे की कमजोरी को दूर करने के लिए , आप अश्वगंधा नामक औषधि का सेवन कर सकते है | इसका सेवन किस तरह से करना है इसकी जानकारी हम आपको दे रहे है |
प्रयोग विधि :- अश्वगंधा के पौधे की जड़ का चूर्ण बनाएं | इस चूर्ण को देशी गे के घी में मिलाकर सेवन करें | इसे आप गाय के दूध के साथ भी खा सकते है |
विशेष बात :- अश्वगंधा की प्रक्रति बहुत गर्म होती है | इसलिए इस औषधि का सही मात्रा में सेवन करना चाहिए | जरूरत से अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है |
Mahilaon Ke Liye Hai Laabhdayak
Mahilaon Ke Liye Hai Laabhdayak
सामान्य मनुष्य अश्वगंधा के पौधे की जड़ का कम से कम आधा चम्मच चूर्ण सभ के समय खाली पेट पानी से लें | इसके बाद ऊपर से गर्म दूध पीयें | दूध के स्थान पर आप चाय भी ले सकते है | इस औषधि का सेवन करने के कम से कम 15 से 20 मिनट के बाद नाश्ता करें | अगर आप किसी भी जडीबुटी को सुबह के समय खाली पेट लेटे है तो अधिक लाभदायक होता है |
किसी भी आयुर्वेदिक औषधि को तीन महीने तक लगातार खानी चाहिए |  इसके बाद 15 दिन तक ना खाएं | फिर से 15 दिन के बाद खाना शुरू कर दें |
यदि आपको कोई भी बीमारी नही है तो भी अप अश्वगंधा का सेवन करना चाहते है तो अश्वगंधा का तीन महीने तक सेवन करने से शरीर को शक्ति मिलती है | इसके साथ ही आपको रोगों से लड़ने की तक भी मिलती है |
औषधि बनाएं :- इसके लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी |
सामग्री :-
मेथी का दाना :- 250 ग्राम
अजवाइन :- 100 ग्राम
काला जीरा :- 50 ग्राम
आदि तीनो सामग्रीयों को अच्छी तरह से साफ करके थोडा सा सेंक लें | इसके बाद तीनों को आपस में मिलाकर पीस लें | इस चूर्ण को किसी शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें | इस चूर्ण को रात के समय आधे चम्मच को गर्म पानी में मिलाकर पीयें | इस औषधि का सेवन करने के बाद किसी भी चीज को ना खाएं ओर न ही पीयें | इस औषधि को सभी उम्र के लोग खा सकते है | इस औषधि का सेवन करने से लगभग 85 से 90 दिनों में लाभ मिल जाता है | अश्वगंधा के चूर्ण का सेवन करने से हमे निम्नलिखित रोगों से मुक्ति मिल जाती है |
अश्वगंधा का रोजाना सेवन करने से शरीर के हर हिस्से में जमा पड़ी हुई गंदगी और मल मूत्र के दवारा बाहर निकल जाते है |
इससे अतिरिक्त चर्बी भी गल जाती है |
चेहरे की झुरियां स्वयं ही दूर हो जाती है |
शरीर के सभी रोगों से निजात मिल जाती है |
अश्वगंधा के सेवन करने से विभिन्न लाभ :-
Ø इसका सेवन करने से आँखों की रौशनी बढती है | कानों की सुनने की क्षमता बढती है और बहरापन दूर हो जाता है |
Ø दांत मजबूत बनते है | इसके आलावा अश्वगंधा बालों के लिए भी अति उत्तम है |
Ø अगर अपने एलोपैथीक औषधि का सेवन किया है और उससे आपको साइड इफेक्ट हो गया है तो अश्वगंधा का सेवन करने से साइड इफेक्ट दूर हो जाता है |
Ø अश्वगंधा का सेवन करने से शादी के बाद की तकलीफे दूर हो जाती है | बहुत सी ऐसी महिलाएं है जिनका शरीर शादी के बाद बैडोल सा हो जाता है | इसके सेवन करने से शरीर सुडोल और शेप में आ जाता है |
Ø पानी ,हवा , धुप और अधिक तापमान के कारण शरीर में होने वाले रोगों से मुक्ति मिल जाती है |
Ø गठिया जैसी बीमारी से भी निजात मिल जाती है |
Ø स्किन में चमक आती है | इसके आलावा स्किन का सुख जाना , चेहरे पर झुरियां पड़ना और हर तरह के चर्म रोग से मुक्ति पाने के लिए अश्वगंधा के चूर्ण का प्रयोग करें |
Ø अश्वगंधा से डायबिटिज के रोग पर भी काबू पाया जा सकता है |
Ø शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढती है |
Ø इससे मनुष्य को बुढ़ापा जल्दी नही आता | व्यक्ति के शरीर में तेज़ बढ़ता है | अश्वगंधा के प्रयोग से नपुंसकता भी दूर हो जाती है |
Ø कब्ज से भी मुक्ति मिल जाती है चाहे वो पुरानी कब्ज ही करों ना हों |
अशवगन्धा के विभिन्न लाभ
अशवगन्धा के विभिन्न लाभ 
Ø अश्वगंधा मनुष्य के खून को साफ़ करता है , शरीर की खून संचार की नलिकाओं को शुद्ध करता है | जिससे खून का संचार उचित प्रकार से हो सके |
Ø इससे मनुष्य के शरीर की हड्डियाँ मजबूत होती है | थकान नही होती | इसके आलावा स्मरण शक्ति भी तेज़ होती है | मनुष्य अधिक समय तक काम कर सकता है | इससे कार्य करने की शक्ति बढती है |
Ø अश्वगंधा के सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रोल कम होता है | इससे दिल का कोई रोग नही होता है और हार्ट अटैक का खतरा भी नही होता |
Ø अश्वगंधा नामक औषधि को हर व्यक्ति खा सकता है लेकिन इस औषधि का सेवन करने से पहले इसकी मात्रा के बारे में अवश्य जान लें | जरूरत से अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है |





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