पित्त उछलना नामक रोग को ठीक करने के उपाय |

पित्त उछलना का कारण और उसका इलाज :-
पित्त उछलना नामक रोग को ठीक करने के उपाय
पित्त उछलना नामक रोग को ठीक करने के उपाय
पित्त उछलना आजकल के समय में एक आम बीमारी रह गई | इस रोग में शरीर पर असामन्य रूप से खुजली मचती है | जिससे व्यक्ति को व्याकुलता होने लगती है | कई बार तो इस बीमारी में इन्सान को दर्द भी होने लगता है | इस रोग के होने के कई कारण है जिसका वर्णन इस प्रकार से है |
दुषित वातावरण में जाने के कारण |
ठंडी हवा लगने के कारण |
पेट की गडबडी या खून की खराबी के कारण भी पित्त उछल जाती है |
खटमल या किसी जहरीले कीड़े के काटने पर यह रोग हो जाता है |
पाचन किर्या के खराब होने के कारण भी यह रोग फैलता है |
पेट की अजीर्ण की समस्या , कब्ज होना , भोजन का उचित प्रकार से ना पचना आदि ऐसी समस्याओं के कारण भी पित्त उछल जाती है |
गैस के बनने से , खट्टी डकारे आने से , और पेट में गर्मी बनने से भी पित्त उछल जाती है |
कई व्यक्ति जब अधिक चिंता करते है और अधिक क्रोध करते है तो उस समय भी पित्त उछल जाती है |
ये थे कुछ कारण जिससे शरीर में पित्त उछल जाती है |
कौन से हिस्से पर उछलती है पित्त :- यह शरीर के किसे भी हिस्से  में हो जाती है | इससे हाथ , पैर , पेट , गर्दन , जांघ या मुंह पर लाल – लाल रंग के चक्कते या दरार आ जाती है | जंहा पर पित्त उछलती है उस स्थान पर थोडा सा भाग उभर जाता है | इस स्थान पर जलन और खुजली होने लगती है | कई बार तो कान , होंठ और माथे पर भी सूजना जाती है | इसके आलावा रोगी को बुखार भी हो जाता है | तो आज हम इस छोटे से लेख के माध्यम से आपको पित्त उछलने के रोग को ठीक करने के कुछ घरेलू उपाय बतायेंगे | जो बिल्कुल सरल उपाय है |
अरंडी के तेल का फायदा
अरंडी के तेल का फायदा 
उपाय :- इस रोग में सबसे पहले रात को सोते समय एक गिलास दूध में अरंडी का तेल मिलाकर पी लें | इसे पीने से सुबह दस्त होकर पेट साफ़ हो जाता है | दूसरे चरण में 5 ग्राम छोटी इलायची के दाने , 10 ग्राम पिपली और 10 ग्राम दालचीनी आदि को लेकर अच्छी तरह से पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | इस चरण को सुरक्षित किसी शीशी में बंद करके रख दें | रोजाना सुबह के समय खाली पेट आधा चम्मच चूर्ण को शहद के साथ या फिर मक्खन के साथ खाएं | इस उपचार को करने से पित्त का उछलना बंद हो जायेगा |
सेब का सिरका का उपयोग
सेब का सिरका का उपयोग 
पित्त के रोगी के लिए सेब का सिरका एक अच्छा और कारगर उपाय है | सेब के सिरके में एंटीओक्सिडेंट तत्व मौजूद होते है जो सुजन को कम करते है | यह स्किन को स्वस्थ रखने में एक अहम हिस्सा निभाता है | पानी को हल्का गर्म कर लें इसे किसी बड़े टब में डालकर इसमें दो कप सेब के सिरके की मिलाएं |अब इस गुनगुने पानी में अपने शरीर का वी हिस्सा डुबायें जंहा पित्त उछली है | इस काम को कम से कम 15 से 20 मिनट तक करें | ऐसा करने से इस रोग से मुक्ति मिल जाती है | यदि स्किन पर थोडा भी प्रभाव बाकि है तो इस किर्या को दोबारा दोहरायं | लाभ मिलेगा |
पुदीने की कुछ पत्तियों को ले | उसे अच्छी तरह से पीसकर पानी में मिलाकर छान लें | अब इसमें इच्छा अनुसार चीनी मिलाकर रोजाना सुबह और शाम के समय पीयें | इस उपाय को करने से पित्त का बार – बार उछलना बंद हो जाता है |
पानी की 200 से 250 मिलीलीटर की मात्रा में थोडा सा पुदीने की पत्तियां , और थोडा सा गुड मिलाकर उबाल लें | जब यह पानी का मिश्रण पक जाये तो इसे किसी कपड़े से छानकर अलग कर लें | इस तरह के अपनी का सेवन करने से केवल तीन के अंदर पित्त में आराम मिल जाता है |
जो लोग पित्त के रोग से परेशान है ,उन्हें रोजाना हल्दी , शहद और मिश्री आदि को मिलाकर खाना चाहिए | इससे पित्त का रोग शांत हो जाता है | लेकिन एक बात का ध्यान रखे कि इसे खाने के बाद हवा में बिल्कुल भी ना जाएँ |
बेसन के लड्डू के फायदे
बेसन के लड्डू के फायदे 
बाजार में मिलने वाला बेसन का लड्डू खरीद लें | इसमें काली मिर्च मिलाकर खाने से पित्ती का रोग दूर हो जाता है | आप बेसन के लड्डू को घर में भी बना सकते है | 
पित्ती के रोग को खत्म करने के लिए रोगी को गेंहू के आटे की दो चम्मच में एक चम्मच हल्दी और थोडा सा घी मिलाकर हलुआ बना लें | जब हलुआ बन जाये तो इसे ठंडा होने के लिए रख दें | ठंडा होने के बाद हलुआ खा लें और उपर से दूध पी लें | पित्ती के रोग में राहत मिलेगी |
गेंहू का आटा और हल्दी मिलाकर उपयोग करें
गेंहू का आटा और हल्दी मिलाकर उपयोग करें 
पित्ती के उछलने पर रोगी को गुड और अजवाइन की गोलियां बनाकर खिलाएं | इसे बनाने के लिए थोडा सा गुड और थोडा सा अजवाइन लेकर चूर्ण बनाकर गोली बनाएं | प्रतिदिन एक गोली शाम के समय ताज़े पानी के साथ खाएं | यह रोग ठीक हो जाता है |
थोडा सा देशी घी लें इसमें थोडा सा सेंधा नमक मिला लें | अब इस घी को गृहसित वाले स्थान पर मलें | इससे पित्ती का रोग शांत हो जाता है |
पित्ती के रोग के लिए गेरू एक लाभकारी इलाज है | गेरू को पीसकर शरीर पर लगाने से लाभ मिलता है |इसके साथ ही साथ आप गेरू के पराठे या मीठे पुए बनाकर भी खा सकते है | लाभ मिलेगा |
गाय के देशी घी में चुटकी भर गेरू मिलाकर खाने से भी फायदा मिलता है |
जिस व्यक्ति को पित्ती का रोग है उसे चिरौजी का सेवन करना चाहिए | इस बीमारी से छुटकारा मिल जाता है |
पित्त के उछलने पर एक उपाय है जो बहुत ही आसान है | हल्दी के बारे में तो सब जानते है जो हर घर में पाया जाता है | हल्दी के पावडर को लेकर पानी में मिलाकर एक पेस्ट या लेप तैयार करें इस तैयार पेस्ट को रोगी मनुष्य को दिन में दो बार पिलायें | इस उपचार को करने से पित्ती के रोगों को बहुत लाभ मिलता है |
गेरू या गैरिक तेल का उपयोग
गेरू या गैरिक तेल का उपयोग 
इस रोग से पीड़ित रोगी को गेरू या गैरिक तेल का उपयोग करना चाहिए |
नागकेसर की दो ग्राम की मात्रा लें | इसमें थोडा सा शहद मिलाकर खाएं | लाभ
मिलेगा |
पित्ती के रोग को दूर करने के लिए एक चम्मच , हल्दी , गेरू , और दो चम्मच शक्कर या चीनी आदि को लेकर सूजी में मिलाकर हलवा बनाएं | इस तैयार हलवे का सेवन करने से लाभ मिलता है |
अमले के चूर्ण का उपयोग
अमले के चूर्ण का उपयोग 
शहद में एक चम्मच त्रिफला का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से पित्ती के रोग में काफी हद तक आराम मिलता है |
सौंठ और गेरू की 5 – 5 ग्राम की मात्रा को लेकर शहद मे मिलाकर खाने से यह रोग ठीक हो जाता है | 
अमले के चूर्ण में थोडा सा गुड मिलाकर एक मिश्रण बनाएं | इस मिश्रण को खाने से गर्मी के कारण उछलने वालो पित्त में आराम मिलता है |
नीम के पेड़ की निबौलियो को तोडकर उसका गुदा अलग कर लें | इसमें थोड़ा सा श्ह्द मिलाकर खाएं | पित्ती का रोग ठीक हो जाता है |
अदरक को पीसकर उसका रस निकाल लें | इस रस में थोडा सा शहद मिलाकर खाएं | बहुत आराम मिलेगा |
हल्दी को गर्म तवे पर भून लें | इसे दूध या शहद में मिलाकर सेवन करने से पित्ती का उछलना बंद हो जायेगा |
कपूर और नारियल का तेल मिक्स कर लें | अब इस तेल से पुरे शरीर की मालिश करें | पित्ती के रोग में लाभ मिलेगा |
पुदीने के पत्ते का उपयोग
पुदीने के पत्ते का उपयोग 
पित्ती के रोग से पीड़ित व्यक्ति को अपने नहाने के पानी में निम्बू निचोड़कर नहाना चाहिए | इस उपाय को करने से अधिक लाभ मिलेगा |
देशी घी में थोडा सा हिंग डालकर अच्छी तरह से मिलाएं | इस मिश्रण को पित्ती वाले स्थान पर लगायें | इया उपाय को करने से पित्ती का रोग शांत हो जाता है | अदरक को पीसकर उसका रस निकाल ले और फिर सरसों के तेल में मिलाकर उससे मालिस करे | पीती को आराम मिलता है |
10 – 12 दाने पिपरमेंट के और एक चममच अजवाइन को 10 ग्राम गुड में मिला ले | और फिर इसका सेवन करने से पीती में आराम मिलता है |
नागरबेल का पत्ता
नागरबेल का पत्ता 
यदि किसी व्यक्ति को गर्मी के कारण पित्ती का रोग हुआ है तो उसे अपने शरीर पर चन्दन के तेल की मालिश करनी चाहिए |
गिलोय के चूर्ण में आधा चम्मच चंदन का बुरादा और शहद मिलाकर खाने से इस रोग से मुक्ति मिल जाती है |
नागर बेल के पत्ते लें | इसे पीसकर रस निकाल लें | इस रस में फिटकरी मिलाकर शरीर पर लगायें | लाभ मिलेगा |
पानी में पीसी हुई फिटकरी मिलाकर नहाने से आश्यर्चजंक लाभ मिलता है |
अजवाइन और गुड़ मिलाकर प्रयोग करें
अजवाइन और गुड़ मिलाकर प्रयोग करें 
एक चम्मच , हल्दी ,काली मिर्च का चूर्ण , और थोड़े से मेथी के दाने को आपस में मिलाकर मिश्री के साथ पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | इस प्रकार से तैयार चूर्ण को रोजाना सुबह के समय दूध या शहद के साथ खाने से लाभ मिलता है |
जिस व्यक्ति को पित्ती का रोग है उसे नीम की पत्तियों का उपयोग करना चाहिए | नीम के पेड़ की कुछ पत्तियों को मुंह में लेकर चबाएं | इन पत्तियों को उस समय तक चबाएं जब तक नीम का कडवा पन खत्म न हो जाएँ | इस उपचार को कम से कम 4 या 5 दिन तक लगातार करने से पित्ती का रोग ठीक हो जाता है |
बकायान के पौधे की छाल को धुप में अच्छी तरह से सुखा लें | जब यह सुख जाये तो इसे पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | इस चूर्ण की 2 रती की मात्रा को शहद के साथ मिलाकर खाने से पित्ती के रोग से मुक्ति मिल जाती है | 
करेले का सेवन करने से लाभ
करेले का सेवन करने से लाभ 
हरिद्राखंड नामक औषधि को दूध के साथ पीयें | इस औषधि का प्रयोग खाना खाने के बाद उपयोग करें |
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को क्या खाना चाहिए और किस चीज से परहेज करना चाहिए | इसका विवरण इस प्रकार से है |
शहद का उपयोग करें
शहद का उपयोग करें 
रोगी को अपने भोजन में हरी सब्जियां , रेशेदार सब्जियां , ताज़े फल जैसे मौसमी और संतरे का फल का सेवन करना चाहिए | भोजन बनाते समय केवल नाम मात्र की नमक डालें | पुराने चावल , मुंग की दाल , चना और जौ आदि का सेवन करना लाभदायक होता है | सर्दी के मौसम में गुनगुने पानी का सेवन करें जबकि गर्मी के मौसम में ताज़े पानी का सेवन करें |
किस चीज से परहेज करें :- गर्म पदार्थ ,गर्म मेवे गर्म फल और गर्म मसालों का अधिक प्रयोग ना कर्ण और यदि हो सके तो बिल्कुल भ ना करें | खटाई तेल , घी आदि का प्रयोग केवल नाम मात्र ही करें | प्याज , लहसुन , अंडा , मांस ,मछली आदि का सेवन ना करें | अन्यथा शीत पित्त और भी बढ़ सकता है | इसलिए उसका सेवन ना करें | पित्त को और बढ़ाने वाली चीज जैसे :- सिगरेट , शराब , और कब्ज पैदा करने वाली गरिष्ट पदार्थों का सेवन ना करें | इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को खट्टे पदार्थ का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें | जैसे दही , खट्टी लस्सी |
रोगी को कडवे पदार्थ या कडवी सब्जियों का सेवन करना चाहिए | इससे उनको अधिक से अधिक लाभ मिलेगा |
  



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