परवल की आधुनिक खेती करने का तरीका, Parval Ki Kheti Krne Ka Trika |

परवल की आधुनिक प्रकार से खेती करने का तरीका :- 
Parval Ki Kheti Krne Ka Trika
Parval Ki Kheti Krne Ka Trika
परवल को पुरे भारत में सभी के रूप में प्रयोग की जाती है | परवल की सब्जी में विटामिन ए और सी की मात्रा अधिक पाई जाती है |
परवल की सब्जी हर मौसम में बाजार में मिल सकती है | इसकी सब्जी फसलों के वर्ग में आती है | इसकी खेती पुरे साल की जाती है | लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी खेती अधिक मात्रा में की जाती है | इसके आलावा बिहार , असम , उड़ीसा , बंगाल , मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र और गुजरात में भी इसकी खेती की जाती है | बिहार की दियार भूमि और पूर्वी उत्तर प्रदेश के रेनफेड के भागों में इसकी खेती अधिक मात्रा में की जाती है |कहा जाता है की आदिवासी के लिए परवल एक चमत्कारी औषधी है | परवल के उपयोग से पेट की परेशानी को दूर किया जाता है |
 परवल की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु :- गर्म और आद्र जलवायु परवल की खेती के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है | परवल की सफल खेती के लिए 100 से 150 सेंटीमीटर तक की बारिश लाभदायक होती है |
   Parval Ki Kheti Ke Liye Upyukt Bhumi
 Parval Ki Kheti Ke Liye Upyukt Bhumi 
परवल की खेती के लिए उपयुक्त भूमि :- इसकी खेती के लिए दोमट मिटटी सर्वोतम मानी जाती है | क्योंकि इस मिटटी में लताएँ पानी के रुकाव को सहन कर सकती है | 
  जिस मिटटी में जीवांश की मात्रा अधिक हो और जल का निकास अच्छी तरह से हो , उस प्रकार की मिटटी परवल की खेती के लिए अच्छी होती है | परवल की खेती गर्म और आद्र जलवायु वाले भागों में अच्छी तरीके से की जाती है | इसलिए परवल की खेती को ठन्डे भागो में नहीं के बराबर उगाया जाता है | इसके आलावा भारत के ऊँचे और पहाड़ी इसके में जहाँ पानी के निकास की अच्छी सुविधा हो वंहा इसकी खेती सफलता से की जा सकती है |
परवल की खेती के लिए भूमि की तैयारी :- परवल को उगाने से पहले खेत में कम से कम 3 जुताई करनी चाहिए | खेत की जुताई करने के बाद पाटा जरुर लगायें | अगर हम परवल को ऊँची भूमि पर बो रहे है तो 30 *30*30 सेंटीमीटर का गहरा गड्ढा खोद लें | परवल के एक पौधे से दुसरे पौधे की दुरी कम से कम 1.5 मीटर की होनी चाहिए | पौधे को बोने के बाद गड्ढो में 5 किलो गोबर की खाद और मिटटी मिलाकर भर दें और हल्की हल्की सिंचाई अवश्य करें |
परवल की जातियां :- परवल की मुख्य रूप से दो प्रकार की जातियां पाई जाती है
 Parval Ki Unnt Kismen,
 Parval Ki Unnt Kismen, 

1. बिहार शरीफ
डंडली
गुल्ली
कल्याणी
निरिया
संतोखिया
सोपारी सफेदा आदि |
    2. उन्नतशील प्रजातियाँ :- इसकी निम्नलिखित किस्मों की खेती की जाती है |
1. एफ. पी. 1
2. एफ. पी.3
3. एफ. पी. 4
4. एच. पी. 1
5. एच. पी. 3
6. एच. पी. 4
7. एच. पी.5
6. छोटा हिली
 7. फैजाबाद परवल 1, 3, 4,
 8 चेस्क सिलेक्शन 1 और 2
9. चेस्क हाईब्रिड 1 और 2
 10. स्वर्ण अलौकिक
11. स्वर्ण रेखा
12 संकोलिया आदि |
परवल की आधुनिक किस्मे निम्नलिखित है | नरेंदर परवल 260 , नरेंदर परवल 307 , नरेंदर परवल 601 , नरेंद्र परवल 604 आदि |
पौधा रोपण की विधि :- परवल की खेती साल में दो बार की जाती है | पहली बार जून के महीने के दुसरे पक्ष में और दूसरी बार अगस्त के दुसरे महीने के मध्य में इसकी खेती की जाती है | परवल का उत्पादन जड़ों की कटिंग करके रोपाई की जाती है | कटिंग के द्वारा रोपाई आसानी से और जल्दी की जाती की जाती है | परवल की रोपाई जड़ों की संखया के आधार पर की जाती है |इसके  3500 या 4000 जड़ों के टुकडें को एक ह्येक्टर भूमि पर लगाये जा सकते है | परवल की जड़ों के टुकड़े की लम्बाई 1 से 1.5 मीटर की होनी चाहिए | समतल भूमि पर इसकी जड़ों को 3 से 5 सेंटीमीटर का गहरा गड्डा खोदकर बोया जाता है | जबकि गड्ढो या नालियों की मेड़ों पर इसे 8 से 10 सेंटीमीटर की गहराई पर बोया जाता है | इसमें नर और मादा का अनुपात 10 : 1 के कटिंग में रखते है | भारत के नदियों के किनारे वाले हिस्से में इसकी खेती अक्तूबर से नवम्बर के महीने में की जाती है |
       :- परवल की खेती में प्रयोग होने वाली खाद :-        
Parval Ki Fasal Ke Liye Khad,
Parval Ki Fasal Ke Liye Khad
आर्गनिक खाद :-  परवल का अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए परवल की बुआई से पहले अपने खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद की 20 से 30 टन की मात्रा को मिला दें | इसके आलावा ५० किलो नीम की खली और 50 किलो अरंडी की खली को आपस में मिलाकर खेत की मिटटी में मिला दें | इन सभी खादों के मिश्रण को खेत में मिलाने के बाद खेत की जुताई कर दें और फिर परवल की रोपाई करें |
ध्यान रहे की खाद की यह मात्रा एक हेक्टेयर भूमि के लिए है | भूमि के हिसाब से आप इसकी मात्रा को घटा और बढ़ा सकते है | फसल के बोने के लगभग 20 से 25 दिन के बाद देशी गाय के 15 लीटर मूत्र में 5 किलो नीम के पेड़ की पत्तियां , आधा किलो तम्बाकू की पत्तियों कुछ दिन के लिए रख दें | जब यह मिश्रण सड़ जाये तो इसे छानकर इसमें 200 लीटर पानी मिलाकर किसी पम्प की मदद से छिडकाव करें | पौधे में इस प्रकार का छिडकाव 20 या 25 दिन के अंतर पर करें | फसलों पर इस दवा का छिडकाव केवल दो या तीन बार ही करना है |
सिंचाई करने का तरीका :- परवल की खेती में मिटटी की नमी के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए | कटिंग या जड़ों की रोपाई के बाद यदि मिटटी  में नमी है तो ह्क्ली सिंचाई करनी चाहिए | यदि जरूरत हो तो 8 या 10 दिन के अंदर सिंचाई करनी चाहिए | गर्मी के मौसम में इसके खेत में 10 या 12 दिन में एक बार सिंचाई अवश्य करनी चाहिए और ठंडे मौसम में एक महीने में दो बार सिंचाई करनी चाहिए | इसके आलावा बारिश के मौसम में जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई करनी चाहिए | सिंचाई करने के बाद जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए |
Parval Ki Fasal Mein Hone Vale Rog
 Parval Ki Fasal Mein Hone Vale Rog
खरपतवारों की रोकथाम :- जब लताएँ ऊपर की ओर फैलती है तो अनचाहे उगे हुए खरपतवार की निराई गुड़ाई कर देनी चहिये |ठंड का मौसम समाप्त होते ही पौधे की जड़ों के पास निराई गुड़ाई करके मिटटी गीली करके पोली क्र देनी चाहिए | ऐसा करने से खरपतवार पर नियंत्रण पाया जा सकता है
परवल की खेती में लगने वाले कीटों पर नियंत्रण :- परवल की फसल पर बहुत सारे कीड़े मकौड़े हानिकारक प्रभाव डालते है | इसके आलावा फल को नुकसान देने वाली मक्खी और फली भ्रंग विशेष रूप से नुक्सान पंहुचाते है |
फल को नुकसान पहुचाने वाली मक्खी :- फलों को नुक्सान देने वाली मक्खी फलों में छेद बनाकर इसमें प्रवेश क्र जाती है और इसी में अंडे दे देती है जिसके कारण फल सड़ जाते है | फलस्वरूप बाजार में इसकी कीमत कम हो जाती है | कभी कभी यह मक्खी फूलों को भी नुकसान देती है | इसकी रोकथाम के लिए एक उपाय है जिसका वर्णन इस प्रकार से है |
       :- उपाय :-
देशी गाय के लगभग 20 लीटर मूत्र , 5 किलो नीम की पत्तियां , 3 किलोग्राम धतूरे के पौधे की पत्तियां , आधा किलोग्राम तम्बाकू की पत्तियां ,  25 ग्राम हिंग और एक किलोग्राम गुड़ की मात्रा को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाएं और इस मिश्रण को तीन दिनों के लिए छाया में रख दें | तीन दिन के बाद इस मिश्रण को छानकर इसमें पानी मिलाकर किसी पम्प की सहयता से फसलों पर छिडकाव करें | ऐसा करने से फलों में होने वाले नुकसान ठीक हो जाते है |
फली भ्रंग :- यह मक्खी पौधे की पत्तियों में छेद करके उन्हें नुकसान पंहुचाते है | यह मक्खी धूसर रंग का गुबरैला होता है | धीरे धीरे यह मक्खी पूरे पौधे के पत्तियों पर फैल जाती है | इसकी रोकथाम करना बहुत जरूरी है | इसके लिए हमे निम्नलिखित उपचार करना चाहिए |
PARVAL KO  KEETON SE BACHANAE KE UAPY
PARVAL KO  KEETON SE BACHANAE KE UAPY 
देशी गाय के लगभग 20 लीटर मूत्र , 5 किलो नीम की पत्तियां , 3 किलोग्राम धतूरे के पौधे की पत्तियां , आधा किलोग्राम तम्बाकू की पत्तियां ,  25 ग्राम हिंग और एक किलोग्राम गुड़ की मात्रा को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाएं और इस मिश्रण को तीन दिनों के लिए छाया में रख दें | तीन दिन के बाद इस मिश्रण को छानकर इसमें पानी मिलाकर किसी पम्प की सहयता से फसलों पर छिडकाव करें | ऐसा करने से पौधे में होने वाला फली भ्रंग नामक रोग ठीक हो जाता है |
चूर्णी फफूंदी नामक रोग :- पौधे में इस रोग के कारण पत्तियों और तनों में एक फफूंदी सी जमा हो जाती है | जिससे पौधे की हरी हरी पत्तियों का रंग पीला हो जाता है और वे मुरझाकर मर जाती है | पौधे में यह रोग एक फफूंदी के कारण होता है | पौधे को इस बीमारी से बचाने के लिए दवा का प्रयोग करना चाहिए |
      :- उपाय :- 
पौधे को इस फफूंदी से बचाने के लिए गाय के लगभग 20 लीटर मूत्र , 5 किलो नीम की पत्तियां , 3 किलोग्राम धतूरे के पौधे की पत्तियां , आधा किलोग्राम तम्बाकू की पत्तियां ,  25 ग्राम हिंग और एक किलोग्राम गुड़ की मात्रा को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाएं और इस मिश्रण को तीन दिनों के लिए छाया में रख दें | तीन दिन के बाद इस मिश्रण को छानकर इसमें पानी मिलाकर किसी पम्प की सहयता से फसलों पर छिडकाव करें| इस प्रकार के उपचार से हम फसलों में होने वाली बीमारी को दूर कर सकते है |
कटाई :- परवल की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए इसके बेलों की छटाई करनी होती है | इसकी छटाई के लिए उपयुक्त समय पहले साल की फसल को लेकर नवंबर या दिसंबर के महीने में की जाती सकती है | बेल को 20 से 30 सेंटीमीटर छोडकर सारे बेल को काट देना चहिये | क्योंकि इस समय परवल की बेल सुषुप्त अवस्था में होती है | बेल को तने के पास से लगभग 30 सेंटीमीटर छोड़ दें और फावड़े से सारे खेत की गुड़ाई कर दें | ऐसा करने से बेल का फुटव कम हो जाता है | जिसमे में लताएँ निकलती है और इन्ही लताओ में मार्च के महीने में फल लगने शुरू हो जाते है |
उपज की प्राप्ति
उपज की प्राप्ति
उपज की प्राप्ति :- परवल की उपज उसकी जाति के अनुसार अलग अलग होती है | लेकिन इसकी ओसात रूप से 250 किवंटल की उपज प्राप्त हो जाती है


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