त्रिकोणासन
जब कोई भी व्यक्ति इस आसन का प्रयोग करता है तो उस व्यक्ति के शरीर स्थिति
त्रिकोण जैसी हो जाती है इसलिए इसे त्रिकोणासन कहा जाता है. त्रिकोणासन की प्रयोग
करने की विधि किस तरह की है आइये जानते है इस तरह से:-
त्रिकोणासन की प्रयोग विधि:-
(1).सबसे पहले समतल भूमि पर अपने दोनों पैरों को दो फुट तक फैलाकर बिल्कुल
सीधे खड़े हो जाए.
(2).इसके बाद अपने एक पैर को साइड में इस तरह से
मोड़े जिस तरह से एक समकोण की स्थिति होती है फिर सांस को बाहर निकालते हुए अपने
उसी हाथ को अपने मुड़े हुए पैर को पकड़े और अपने दूसरे हाथ को कान से सटाते हुए सिर
से ऊपर बिल्कुल सीधा रखें.
(3).इसी प्रकार से अपने दूसरे पैर को मोड़ते हुए
बताई गई क्रिया के अनुसार करें.
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Trikonasana Pose and benefits, त्रिकोणासन के लाभ और विधि |
सावधानी -1. इस आसन को करते समय अपने पैरों को
ध्यान पूर्वक मोड़े और आसन की क्रिया करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा
रखें.
2.ये ध्यान रखें कि आसन करते समय आपके शरीर में
स्थिरता की स्थिति नहीं आनी चाहिए और आसन को धीरे-धीरे बड़े ही ध्यान से करना
चाहिए.
3.जब आप अपने पैर को एक तरफ कर ले तथा सीधे खड़े
हो जाये तब आप सांस को अन्दर की ओर ले और अपनी क्षमता के अनुसार सांस को रोके रखें
और जब आप क्रिया को करने लग जाए तब आप सांस को बाहर निकाल दें.
लाभ -@-इस आसन को करने से आपके शरीर की रीढ़ की
हड्डी मजबूत बनेगी साथ ही शरीर फुर्तीला हो जाएगा.
@-कमर में किसी भी प्रकार का दर्द को ठीक करने
और कमर को पतली करने का सबसे अच्छा आसन है. ये आसन कब्ज जैसी बीमारी को ठीक करने
में अधिक लाभकारी है.
@-इस आसन का रोजाना अभ्यास करने से मनुष्य का
ह्रदय मजबूत हो जाता है और शरीर में बढ़ी हुई चर्बी को समान्य स्थिति में कर देता
है.
@-इस आसन का लगातार प्रयोग करने से हाथ व पैरों
की मांसपेशियां पुष्ट और लचीली बन जाती है तथा शरीर को ताकतवर बना देता है.
नोट –ये आसन सभी मनुष्य के लिए लाभदायक और
लाभकारी होता है परन्तु ये ध्यान रहें कि गर्भावती महिलाए इस आसन का लाभ नहीं उठा
सकती है.
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