बहेड़ा के आयुर्वेदिक उपयोग | Baheda Ke Aayurvedik Upyog

बहेड़ा 
बहेड़ा के पेड़ बहुत ही ऊंचे, लम्बे और फैले हुए होते हैं. इसके पेड़ पर जो फल लगते हैं उन्हें बहेड़ा के नाम से जाना जाता हैं. बहेड़ा के अंदर से एक मींगी निकलती हैं जिसका स्वाद खाने में मीठा होता हैं. बहेड़ा का उपयोग एक औषधि के रूप में किया जाता हैं. तो चलिए जानते हैं बहेड़ा के कुछ औषधीय प्रयोगों के बारे में. 
बहेड़ा के आयुर्वेदिक उपयोग
बहेड़ा के आयुर्वेदिक उपयोग
बहेड़ा का विभिन्न रोगों में इस्तेमाल –
१. हाथ पैरों की जलन – अगर आपके हाथ और पैरों में जलन होती हैं तो इसके लिए आप बहेड़ा का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए बहेड़ा के फल के अन्दर की मींगी को निकाल लें और इसे अच्छी तरह से पानी के साथ पीस लें. इसके बाद इस लेप को अपने हाथ और पैरों पर लगायें. इस लेप को लगाने से आपके हाथ और पैरों में होने वाली जलन शांत हो जायेगी. 

२. कफ – यदि किसी व्यक्ति को कफ रोग हैं तो इस रोग से निजात पाने के लिए बहेड़ा के पत्ते लें और थोड़ी सी मिश्री लें. इसके बाद इन दोनों को पानी में डालकर उबाल लें और एक काढ़ा तैयार कर लें. जब काढ़ा पककर तैयार हो जाए तो कुछ देर इसे ठंडा करने के बाद इसका सेवन करें. नियमित रूप से इस काढ़े अ सेवन करने से कफ रोग दूर हो जाएगा. 

३. खांसी – अगर किसी व्यक्ति को बलगम वाली खांसी हो गई हैं तो खांसी से जल्द छुटकारा पाने के लिए आप बहेड़ा के पेड़ की चाल का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए बहेड़ा के पेड़ की चाल लें और इसे अपने मुंह में डालकर चूस लें. बहेड़ा के पेड़ की छाल चूसने से आपकी खांसी तो ठीक हो ही जायेगी इसके साथ ही बलगम की शिकायत भी दूर हो जायेगी. 

४. कामशक्ति बढाने के लिए – अगर किसी व्यक्ति को अपने अंदर काम शक्ति की कमी महसूस होती हैं तो इसकी पूर्ती हेतु उसे रोजाना बहेड़ा का छिलका जरुर खाना चाहिए. क्योंकि बहेड़ा का छिलका कामशक्ति बढ़ाने के लिए बहुत ही उपयोगी होता हैं.
५. आँखों की रौशनी बढाने के लिए – अगर आपको नजर दृष्टि दोष हैं तो इस दोष से मुक्ति पाने  के लिए आप बहेड़ा के छिलके का इस्तेमा ल कर सकते हैं. इसके लिए बहेड़ा के फल का छिलका लें और मिश्री के दाने लें. अब इन दोनों को एक साथ मिलाकर इसका चूर्ण बना लें और इस चूर्ण का सेवन रोजाना दिन में दो बार हल्के गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच की मात्रा में करें. इस चूर्ण का नियमित रूप से सेवन करने से आपकी आँखों की रौशनी बढ़ जायेगी. 
 Baheda Ke Aayurvedik Upyog
 Baheda Ke Aayurvedik Upyog
६. कब्ज – यदि आपको अधिक समय पत में कब्ज बनने की शिकायत रहती हैं तो इसके लिए बहेड़ा का आधा पका हुआ फल लें और इसे पीस लें. इसके बाद इसका सेवन एक गिलास पानी के साथ रोजाना करे. इससे आपके पेट में कब्ज बन्ने की शिकायत दूर हो जायेगी. 

७. दमा – अगर किसी व्यक्ति को साँस से जुडी हुई बीमारी दमा हैं तो इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए आप बहेड़ा का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए बहेड़ा के फल का गूदा निकालकर इसे पीस लें और इसके बाद इससे छान लें. अब इस मिश्रण में 10 से 15 ग्राम अच्छी तरह से फूला हुआ नौसादर मिला दें. अब इसमें 5 ग्राम सोनागेरू पीसकर मिला लें. अब इन सभी चीजों को अच्छी तरह से मिलाकर इस मिश्रण को रोजाना शहद के साथ चांटे. इस मिश्रण को चाटने से आपको दमा रोग में काफी आराम मिलेगा और यदि आप इसका सेवन नियमित रूप से करते हैं तो आपको कुछ ही दिनों में दमे की बीमारी से हमेशा – हेमशा के लिए मुक्ति मिल जायेगी.
Baheda Ka Vibhinn Rogon Mein Kaise Istemal Karen
Baheda Ka Vibhinn Rogon Mein Kaise Istemal Karen
८. मुंहासे – अगर आपके चेहरे पर मुंहासे निकले हुए हैं और और इसी वजह से आपको काफी जगह पर शर्मिंदगी महसूस होती हैं तो इसके लिए रोजाना रात को सोने से पहले अपने चेहरे पर बहेड़ा की मींगी का तेल लगाकर सो जाएँ. रोजाना चेहरे पर इस तेल को लगाने से आपके चेहरे के मुंहासे खत्म हो जायेंगे. 

९. पेचिस – अगर आपको पेचिस की बीमारी हैं तो इसके लिए बहेड़ा के छिलके का चुर्ण लें और इसमें थोडा सा शहद मिला लें. इसके बाद इस चूर्ण का सेवन दिन में दो बार नियमित रूप से करें आपक शीघ्र ही पेचिस की बिमती से छुटकारा मिल जाएगा. इस चरण का इस्तेमाल पीलिया के रोगी भी कर सकते हैं उनके लिए भी यह चूर्ण लाभकारी होता हैं. 
Baheda Ek Prakritik Aushdhi
Baheda Ek Prakritik Aushdhi
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