Importance of Sex Education in Family in Hindi | बच्चो की जिन्दगी में सेक्स एजुकेशन का महत्व

बच्चो की जिन्दगी में सेक्स एजुकेशन का महत्व
(sex education for teenagers children)

जैसा की हम सभी जानते है | बच्चो को हर विषय की जानकारी होना बहुत जरुरी है | आज कल के बच्चो का mind बहुत creative होता है | अगर किसी विषय पर foucs करते है | तो उस विषय को पुरी तरह समझने की कोशिश करते है | इसलिए बच्चो से हर विषय में बात करनी चाहिए उन्हें अच्छी तरह समझना चाहिए | ऐसा करने से बच्चे आप से अपनी सभी बाते share करेंगे |

हम सभी जानते है | हमारी दुनिया में कुछ बाते बच्चो से गुप्त रखी जाती है | जैसे बच्चो को सेक्स education provide न करना | सेक्स एक गुप्त विषय है, लेकिन बच्चो को इसके बारे में पूर्ण जानकारी होना भी बहुत जरुरी है | जब बच्चे teen age में प्रवेश करते है | तो वह सेक्स के बारे में जाने की कोशिश करने लगते है | यह कोई गलत बात नही है बच्चो को इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए | जब बच्चो को इस विषय के बारे में जानकारी नही मिलती है तो बच्चे इस जानकारी के लिए internet का प्रयोग करके इस जानकारी को जानने की कोशिश करते है | और सेक्स से related जानकारी के लिए वो net प्रयोग कर के कुछ गलत विषय में पहुँच जाते है | जैसे  Adult or bold pictures etc | जिसके कारण बच्चो की सोच बदल जाती है और वे गलत direction में चले जाते है | इसलिए बच्चो को सेक्स education होना बहुत जरुरी होता है |

 
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बच्चो से सेक्स एजुकेशन के बारे में कब और कैसे बात करे

बच्चो के लिए educated होना जितना ज्यादा जरुरी है | उतना ही बच्चो को knowledgable होना भी जरुरी है | अब बच्चो को education के साथ – साथ उनके शारीरिक संरचना की जानकारी भी स्कूल में provide की जानी चाहिए | जब बच्चा 12 साल का हो जाता है तो माता – पिता को अपने बच्चो से सभी विषय में बात करनी चाहिए | बात जब सेक्स education की आती है | तो कोई भी बच्चो से इस विषय में पूर्ण रूप से बात नही करता है उनसे बचने की कोशिश करते है और बहाना ढूँढ़ते है | वास्तव में सेक्स एक शारीरिक संभंध ही नही होता है | बच्चो को अपने प्राइवेट पार्ट्स के बारे में जानकारी होना बहुत जरुरी होता है | बच्चा जब 4 या 7 साल का होता है वह पूछ सकता है उसके पास अलग सुसु है और दीदी के पास क्यों नहीं है | इन सभी बातों का हमे जवाब सही तरीके से देना चाहिए | जब बच्चा teenage में प्रवेश करता है तो आपको उस समय तक खुद को उसके साथ सेक्स education के बारे में बात करने के लिए तैयार कर लेना चाहिए | जब बच्चा 4 या 5 साल का होता है और वो यह सवाल करता है की मैं कहाँ से आया हूँ | तो आप पेट की और ईशारा करके बता देंगे की पेट से आया है | लेकिन अगर यही बात कोई 10 या 12 साल का बच्चा पूछता है तो आपका जवाब अलग होगा | उम्र के साथ जवाब में बदलाव आने लगता है | और यह बदलाव बहुत जरुरी होता है क्योंकि बच्चो को अपनी उम्र के साथ हर विषय की पूरी मिलनी चाहिए |

सेक्स education के बारे डॉक्टर का क्या मानना है |

जैसा की हम सभी जानते है | बच्चो के दिमाग में क्या चल रहा होता है और वो कभी भी कुछ भी पूछ लेते या कभी भी कुछ भी कर देते है | इसलिए माता – पिता को बच्चो को समझाना चाहिए | जिस भाषा का प्रयोग आप घर पर करते है उसी भाषा में बच्चो को शरीर के हिस्सों के बारे में बताना चाहिए | बच्चो को जरुर बताए की लड़की के प्राइवेट पार्ट को वेजाइना कहते है और लडको के प्राइवेट पार्ट को पेनिस कहते है | इस सब बातो के साथ – साथ बच्चो को यह बताना भी बहुत जरुरी है की वे अपना प्राइवेट पार्ट कब छुएं और कब नही | जब बच्चे नहाते है तभी वो प्राइवेट पार्ट छुएं और किसी ओर के सामने ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए | छोटे बच्चे हमेशा एक बात जरुर पूछते है | बच्चे कहाँ से आते है | उस समय आप उनसे कहे की माता – पिताकुछ खास तरह से प्यार करते है | उसके बाद ही बच्चा इस दुनिया में आता है | बच्चे के एक जानकारी होना बहुत जरुरी होता है की अगर मम्मी या पापा के अलावा कोई व्यक्ति उनके प्राइवेट पार्ट को छुता है तो वह घर आकर माता – पिता को यह बात जरुर बताए | साथ ही समझाएं की बाहर किसी भी व्यक्ति से अपने प्राइवेट पार्ट के बारे में न पूछे |


 
जब बच्चा mature होने लगता है |

      जब बच्चा बड़ा होने लगता है | उसमे बहुत से बदलाव आने लगते है | जिसके बारे में उन्हें कोई ज्ञान नही होता है | 12 या 13 साल की उम्र में प्युब्र्टी पीरियड समय की शुरुआत होती है | उस समय शरीर में बहुत से बदलाव आने लगते है | बच्चे को बहुत अजीब सा महसूस होने लगता है | उस समय माता – पिताका कर्त्तव्य होता है की वह बच्चे को relax feel कराए | उन्हें अच्छे से समझाए ताकि बच्चा परेशान न हो | अगर हो सके तो आप बच्चे से अपने प्युब्र्टी पीरियड के समय का अनुभव शेयर करे बच्चे को बहुत अच्छा लगेगा आपका उसे अपनी बाते शेयर करना |

 वैसे तो बच्चो को स्कूल से भी यह जानकारी मिल सकती है | लेकिन जितने अच्छे से बच्चा माता – पिता से सीखता है उतने अच्छे से स्कूल से नही सीख सकता है | बच्चो को tv, media, net से भी बहुत से जानकारी मिलती है | लेकिन बच्चे के लिए उन्हें समझना बहुत मुस्किल हो जाता है | और बच्चे गलत रास्ते पर जाने लगते है | इसलिए बच्चो को किसी भी विषय में बात करनी हो तो सबसे पहले माता – पिताको ही उन्हें समझाना चाहिए | ऐसा करने से बच्चा कही और से ये जानकारी नही लेना चाहेगा |

Importance of Sex Education in Family in Hindi , बच्चो की जिन्दगी में सेक्स एजुकेशन का महत्व


 माता – पिता का व्यवहार


जब बच्चे जवान होने लगते है | उनकी सोच भी बदलने लगती है | और उनके साथ – साथ माता – पिता की सोच बदलना भी बहुत जरुरी होता है | उन्हें अपना रहने - सहने का ढंग बदलना पड़ता है | बच्चो के सामने एक दूसरे की देखभाल करना या एक दूसरे से प्यार करना अच्छी बात है | लेकिन इसे ज्यादा कुछ भी बच्चो के सामने नहीं करना चाहिए | इसका बच्चो पर बहुत गलत असर होता है | माता – पिता को अपनी सोच बदलनी भी बहुत जरुरी होती है | जिससे की वो बच्चो को अच्छे से सेक्स education provide कर सके | आपको कभी भी ये नहीं सोचना चाहिए की सेक्स education से आपका बच्चा बिगड़ जायेगा या कामुक हो जायेगा | ये सोचना बिल्कुल व्यर्थ होता है | बच्चो से खुल के बात करने से बच्चे अधिक समझदार और जिम्मेदार होते है | बस उन्हे प्रैक्टिकल करके मत दिखाना |

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